उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh nai hum pe guzar jae to phir sher kahen

कुछ नई हम पे गुज़र जाए तो फिर शे'र कहें

کچھ نئی ہم پہ گزر جائے تو پھر شعر کہیں

शायर: Aarif Akhtar Naqvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ नई हम पे गुज़र जाए तो फिर शे'र कहें
भूली-बिसरी कोई याद आए तो फिर शे'र कहें

ज़िंदगी हम को लगे फिर से जो अनजानी सी
और गया वक़्त पलट आए तो फिर शे'र कहें

कोई उड़ता हुआ आँचल कोई बिखरी हुई ज़ुल्फ़
शे'र कहने को जो उकसाए तो फिर शे'र कहें

फ़िक्र-ए-फ़र्दा ग़म-ए-अय्याम का छाया है ग़ुबार
ज़ेहन से धुँद ये छट जाए तो फिर शे'र कहें

कर्ब-ए-एहसास का इज़हार है मक़्सूद-ए-ग़ज़ल
दर्द लफ़्ज़ों में सिमट आए तो फिर शे'र कहें