उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rang-e-sohbat uDa jabinon se

रंग-ए-सोहबत उड़ा जबीनों से

رنگ صحبت اڑا جبینوں سے

शायर: Yahya Khan Yusuf Zai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रंग-ए-सोहबत उड़ा जबीनों से
जब मरासिम हुए मशीनों से

कौन उठाता है अब पराए ग़म
लोग डरते हैं आस्तीनों से

दुश्मनी अपनी ख़ानदानी थी
दोस्ती थी मगर कमीनों से

ख़ातिमुस्सादिक़ीन हैं हम लोग
सो निकाले गए ज़मीनों से

हम ने आवारगी में सीख लिया
बच के रहना है रह-नशीनों से