उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rah-e-be-saeban se koi rishta joD kar dekhun

रह-ए-बे-साएबाँ से कोई रिश्ता जोड़ कर देखूँ

رہ بے سائباں سے کوئی رشتہ جوڑ کر دیکھوں

शायर: Yasmeen Hameed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रह-ए-बे-साएबाँ से कोई रिश्ता जोड़ कर देखूँ
मैं अपने शहर की सारी फ़सीलें तोड़ कर देखूँ

हवा के रुख़ पे उड़ते अब्र को रोकूँ भला कैसे
जो रस्ता ख़ुश्क है तो आबला ही फोड़ कर देखूँ

तअ'य्युन तो करूँ किस सम्त में मुझ को भटकना है
किसी के साथ हो लूँ या किसी को छोड़ कर देखूँ

तुम्हारा अक्स मेरी आँख पर क्यों खिल नहीं पाता
इस आईने के अंदर क्या है इस को तोड़ कर देखूँ

मुझे लगता तो है मैं भी किसी रस्ते की मंज़िल हूँ
ज़रा इक ज़िंदगी के ज़ाविए को मोड़ कर देखूँ