उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raat ko maine KHwab ajab sa dekha hai

रात को मैं ने ख़्वाब अजब सा देखा है

رات کو میں نے خواب عجب سا دیکھا ہے

शायर: Zafar Zaidi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रात को मैं ने ख़्वाब अजब सा देखा है
आगे आग है रौशन पीछे दरिया है

कमरे के अंदर तो घुटन है उलझन है
बाहर झाँक के देखें मौसम कैसा है

सारे रिश्ते तोड़ के हम तो आए थे
फिर ये बीच हमारे झगड़ा कैसा है