उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankhon mein tha pyar labon par nam wafa ka tha

आँखों में था प्यार लबों पर नाम वफ़ा का था

آنکھوں میں تھا پیار لبوں پر نام وفا کا تھا

शायर: Zafar Zaidi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँखों में था प्यार लबों पर नाम वफ़ा का था
कल तक तो वो शख़्स भी बिल्कुल मेरे जैसा था

अपनी अपनी मुट्ठी में सब जुगनू रक्खे थे
लेकिन सब की राहों में कितना अँधियारा था

आँधी आने से पहले ही बच्चे जाग गए
रात हवाओं के चलने में शोर बला का था

हल्की सी बौछार ने सारे नक़्श मिटा डाले
रंग हमारी तस्वीरों का कितना कच्चा था

प्यास की शिद्दत बढ़ते ही मालूम हुआ हम को
जान बचाने में साहिल से आगे दरिया था

आज न जाने क्या कुछ देख के चुप हो जाता है
कल तक ये आईना बिल्कुल मेरे जैसा था