उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil-o-dimagh mein phir mashwara sa hone laga

दिल-ओ-दिमाग़ में फिर मशवरा सा होने लगा

دل و دماغ میں پھر مشورہ سا ہونے لگا

शायर: Zafar Zaidi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल-ओ-दिमाग़ में फिर मशवरा सा होने लगा
मैं अपने आप से ख़ुद ही लिपट के रोने लगा

सितारे टूट के गिरने लगे बिछौने पर
मैं ले के चाँद को बाँहों में जब भी सोने लगा

उधर नज़र ने तआ'रुफ़ का अब्र दिखलाया
इधर मैं अपनी उमीदों की फ़स्ल बोने लगा