उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baad uske mere ghar mein aur kya rah jaega

बा'द उस के मेरे घर में और क्या रह जाएगा

بعد اس کے میرے گھر میں اور کیا رہ جائے گا

शायर: Zafar Zaidi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बा'द उस के मेरे घर में और क्या रह जाएगा
बस किसी के नाम का पत्थर लगा रह जाएगा

कान भर जाएँगे मेरे ख़ल्वतों के शोर से
उस की यादों का पयम्बर बोलता रह जाएगा

क़ैद कर लेगा कोई बच्चा परों को काट कर
आसमाँ की सम्त तोता देखता रह जाएगा

क़त्ल कर डालूँ मैं ख़ुद को सोचता हूँ बार बार
मेरे हाथों में मगर ये ख़ूँ लगा रह जाएगा

अजनबी बन बन के पूछुँगा मैं अपनी ख़ैरियत
आज आईना मिरा मुँह देखता रह जाएगा

लम्स के शो'लों में सारी हड्डियाँ गल जाएँगी
सिर्फ़ काँधों पर हमारा सर धरा रह जाएगा

लोग वीराने में छुप जाएँगे मारे ख़ौफ़ के
बस्तियों के बीच उल्लू बोलता रह जाएगा

यूँ उड़ाऊँगा मैं सब के सामने अपना मज़ाक़
वो मिरे बारे में क्या कुछ सोचता रह जाएगा