उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raat ke gumbad mein yaadon ka basera ho gaya hai

रात के गुम्बद में यादों का बसेरा हो गया है

رات کے گنبد میں یادوں کا بسیرا ہو گیا ہے

शायर: P P Srivastava Rind3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रात के गुम्बद में यादों का बसेरा हो गया है
चाँद की क़िंदील जलते ही उजाला हो गया है

ख़ामुशी की आँधियाँ बाग़ी नज़र आती हैं मुझ को
रात काली है तो सन्नाटा भी काला हो गया है

क़िस्सा-ए-रेग-ए-रवाँ जब आँधियों की ज़द पे आया
धुँद का हैरत-ज़दा आसेब तन्हा हो गया है