उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rasta hai pur-KHatar ye soch kar

रास्ता है पुर-ख़तर ये सोच कर

راستہ ہے پر خطر یہ سوچ کر

शायर: Om Prabhakar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रास्ता है पुर-ख़तर ये सोच कर
सुब्ह से बैठा हूँ मैं दहलीज़ पर

शाख़-ए-तन्हा पर कभी था आशियाँ
आशियाँ में आसमान-ओ-बाल-ओ-पर

बे-दर-ओ-दीवार दुनिया इश्क़ की
खो गया संसार ज़ेर-ए-बाम-ओ-दर

टूटता जाता है मेरा हौसला
आ रहा है मेरी जानिब राहबर

चल कि तुझ को तेरे घर तक छोड़ दूँ
तू अगर रहने दे मुझ को मेरे घर

आज तक आए न जो ज़ेर-ए-क़लम
ढूँड वो अल्फ़ाज़ जो हैं दर-ब-दर