उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rasta be-zaban be-sada bhi nahin

रास्ता बे-ज़बाँ बे-सदा भी नहीं

راستہ بے زباں بے صدا بھی نہیں

शायर: Ejaz Ansari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रास्ता बे-ज़बाँ बे-सदा भी नहीं
कोई मुड़ कर मगर देखता भी नहीं

मेरे लहजे से ना-आश्ना भी नहीं
कोई दरवाज़ा लेकिन खुला भी नहीं

'उम्र-भर हम भटकते रहे दर-ब-दर
कोई मंज़िल कोई रास्ता भी नहीं

सर झुका कर मिले दोस्तों से मगर
क़द हमारा किसी से घटा भी नहीं

ख़ुद की नज़रों में गिर कर पता ये चला
इस से बढ़ कर तो कोई सज़ा भी नहीं

ऐ फ़लक तू हमारा निगहबान है
इन फ़सादों में अब कुछ बचा भी नहीं

इंकिसारी से मिलते हैं 'ए'जाज़' हम
वर्ना हम से तो कोई बड़ा भी नहीं