उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ras kab aati hai KHushiyon ki farawani mujhe

रास कब आती है ख़ुशियों की फ़रावानी मुझे

راس کب آتی ہے خوشیوں کی فراوانی مجھے

शायर: Iftikhar Naseem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रास कब आती है ख़ुशियों की फ़रावानी मुझे
फिर डुबो जाएगी बहर-ए-ग़म की तुग़्यानी मुझे

कब तलक बे-सूद देखूँगा किताब-ए-माह-ओ-साल
कब तलक करनी है यूँ औराक़-गर्दानी मुझे

वापसी का रास्ता भूला हूँ दुनिया देख कर
दूर ले आई है मुझ से मेरी हैरानी मुझे

देखते ही देखते मैं बिक गया हूँ हाथों-हाथ
कर गई नायाब कितना मेरी अर्ज़ानी मुझे

लिख रहा हूँ ख़ुद ही मर्ग-ए-ज़ात का नौहा 'नसीम'
वक़्त ने सौंपी है मेरी मर्सिया-ख़्वानी मुझे