उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qatre mein dariya zarre mein sahra dikhai de

क़तरे में दरिया ज़र्रे में सहरा दिखाई दे

قطرے میں دریا ذرے میں صحرا دکھائی دے

शायर: Badr Jamali6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़तरे में दरिया ज़र्रे में सहरा दिखाई दे
वा दिल की आँख हो तो तमाशा दिखाई दे

तेरी नज़ीर हुस्न-ओ-अदा में कोई नहीं
मुझ को बता दे कोई जो तुझ सा दिखाई दे

अपनी बुराइयों पे अगर जाएगी नज़र
दुनिया में हर कोई हमें अच्छा दिखाई दे

छानी है इस लिए रह-ए-दैर-ओ-हरम की ख़ाक
शायद तुम्हारा नक़्श-ए-कफ़-ए-पा दिखाई दे

अपनी हयात-ए-इश्क़ पे डालें अगर नज़र
ना-ख़ुश-गवारियों का पुलंदा दिखाई दे

गुल की अदा चमन में 'जमाली' है दिल-पज़ीर
सीना हो ग़म से चाक तो हँसता दिखाई दे