उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qarib aa to sahi ai ghazal-e-shab mere

क़रीब आ तो सही ऐ ग़ज़ाल-ए-शब मेरे

قریب آ تو سہی اے غزال شب میرے

शायर: Yawar Azeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़रीब आ तो सही ऐ ग़ज़ाल-ए-शब मेरे
तिरे दुखों का मुदावा करेंगे लब मेरे

गली गली से उभरती रही मलाल की चाप
तू डूब डूब गया नग़्मा-ए-तरब मेरे

घिरा हुआ था 'अजब कम-शनास लोगों में
कुढब दिखाई दिए हर किसी को ढब मेरे

अगरचे मेरे लबों पर लगी है मोहर-ए-सुकूत
मुकालमे हैं तिरी याद से 'अजब मेरे

उन्ही के फ़ैज़ से पाई है सब्र की ता'लीम
अदीब निकले तलामीज़-ए-बे-अदब मेरे

ये पहले प्यार की बारिश ये भीगने का मज़ा
टपक पड़ा तू कहाँ रंज-ए-बे-तलब मेरे

मैं रौशनी के क़बीले का फ़र्द हूँ 'यावर'
ये चाँद और सितारे हैं हम-नसब मेरे