उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qais ka bhi kahin Thikana ho

क़ैस का भी कहीं ठिकाना हो

قیس کا بھی کہیں ٹھکانا ہو

शायर: Om Prabhakar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़ैस का भी कहीं ठिकाना हो
थोड़ा पानी हो थोड़ा दाना हो

अपना पतझड़ छुपा के सीने में
बाग़-ए-दुनिया में आना जाना हो

सर्द हों गर्म हों हवाएँ हों
मौसम-ए-दिल ज़रा सुहाना हो

एक आँगन हो दो मुँडेरें हों
और थोड़ा सा चहचहाना हो

इक तसव्वुर ज़रा सा लम्स-ए-हुनर
तेरा पैकर हो जो बनाना हो