उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qahr Dhata hai muskurana tera

क़हर ढाता है मुस्कुराना तिरा

قہر ڈھاتا ہے مسکرانا ترا

शायर: Kabeer Halati8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़हर ढाता है मुस्कुराना तिरा
फिर भी भाता है मुस्कुराना तिरा

जो मुझे खींचता है तेरी तरफ़
ऐसा नाता है मुस्कुराना तिरा

जिस को सुन लेती हैं मिरी आँखें
गुनगुनाता है मुस्कुराना तिरा

मेरी हर रात को मिरे महबूब
दिन बनाता है मुस्कुराना तिरा

मुस्कुराता हूँ मैं भी जब मुझ को
याद आता है मुस्कुराना तिरा

ऐसा लगता है सब्र को मेरे
आज़माता है मुस्कुराना तिरा

मेरी काली अँधेरी रातों को
जगमगाता है मुस्कुराना तिरा

रोने लगता हूँ मैं 'कबीरा' तब
जब सताता है मुस्कुराना तेरा