उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qahqahon mein baDi udasi hai

क़हक़हों में बड़ी उदासी है

قہقہوں میں بڑی اداسی ہے

शायर: Tahir Saood Kiratpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़हक़हों में बड़ी उदासी है
क्या यही चीज़ ख़ुद-शनासी है

क़ाबिल-ए-दाद ख़ुश-लिबासी है
शे'र ताज़ा है फ़िक्र बासी है

और ये बेल बढ़ने मत देना
आज नाराज़गी ज़रा सी है

मुझ को हासिल है एक ऐसा दोस्त
जो ज़रूरत से कम सियासी है

मुस्तक़िल आँख में समंदर है
मुस्तक़िल आँख फिर भी प्यासी है

इस लिए साँप पाल रक्खे हैं
हाजत-ए-ज़हर अच्छी-ख़ासी है

अब ग़ज़ल इतनी हो चुकी है जदीद
अब ग़ज़ल 'मीर' की नवासी है