उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qafas mein hon ki tair aashiyan mein

क़फ़स में हों कि ताइर आशियाँ में

قفس میں ہوں کہ طائر آشیاں میں

शायर: Jaleel Manikpuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़फ़स में हों कि ताइर आशियाँ में
तिरा करते हैं ज़िक्र अपनी ज़बाँ में

चमन यूँ ही रहेगा नज़र-ए-सरसर
है इक तिनका भी जब तक आशियाँ में

हुजूम-ए-अश्क में मिलता नहीं दिल
मिरा यूसुफ़ है गुम इस कारवाँ में

मुज़क्कर और मोअन्नस की हैं बहसें
बड़ा झगड़ा है ये उर्दू ज़बाँ में

'जलील' इस बाग़ में काँटे की सूरत
खटकता है निगाह-ए-बाग़बाँ में