उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qadam shabab mein aksar bahakne lagta hai

क़दम शबाब में अक्सर बहकने लगता है

قدم شباب میں اکثر بہکنے لگتا ہے

शायर: Hafeez Banarasi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़दम शबाब में अक्सर बहकने लगता है
भरा हो जाम तू अज़-ख़ुद छलकने लगता है

कोई चराग़ अँधेरों में जब नहीं जलता
किसी की याद का जुगनू चमकने लगता है

शब-ए-फ़िराक़ मुझे नींद जब नहीं आती
ये किस का हाथ मिरा सर थपकने लगता है