उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pyar ka dushman sara zamana kal bhi tha aur aaj bhi hai

प्यार का दुश्मन सारा ज़माना कल भी था और आज भी है

پیار کا دشمن سارا زمانہ کل بھی تھا اور آج بھی ہے

शायर: Tabish Raihan10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

प्यार का दुश्मन सारा ज़माना कल भी था और आज भी है
दीवानों का मुश्किल जीना कल भी था और आज भी है

दुनिया बदली मौसम बदला लेकिन मेरा यार नहीं
उस के दिल पर मेरा क़ब्ज़ा कल भी था और आज भी है

हर मुश्किल हालत में दी है मैं ने फ़क़त आवाज़ तुझे
सब से ज़ियादा तुझ पे भरोसा कल भी था और आज भी है

मुझ को कभी झुलसा न सकी ये तन्हाई और ग़म की धूप
मुझ पर तेरे प्यार का साया कल भी था और आज भी है

मुझ से जुदा हो जाने वाले तुझ को कहाँ मैं भूल सका
मेरे दिल में तेरा ठिकाना कल भी था और आज भी है

प्यार के दुश्मन दुनिया से नापैद हुए कब के लेकिन
प्यार के मतवालों का चर्चा कल भी था और आज भी है

ख़ुशियों के जो फूल खिले वो पल-दो-पल में मुरझाए
मेरा मुक़द्दर तपता सहरा कल भी था और आज भी है

कौन ये कहता है वो मुझ को और मैं उस को भूल गया
इक दूजे से अपना रिश्ता कल भी था और आज भी है

मेरी इजाज़त की क्या हाजत जब जी चाहे आ जाना
तुझ पे खुला दिल का दरवाज़ा कल भी था और आज भी है

प्यार के दो मतवालों को कर देना बर्बाद और तबाह
'ताबिश' ये दस्तूर-ए-ज़माना कल भी था और आज भी है