उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum na kahenge KHud hi batao kya ye achchha karte ho

हम न कहेंगे ख़ुद ही बताओ क्या ये अच्छा करते हो

ہم نہ کہیں گے خود ہی بتاؤ کیا یہ اچھا کرتے ہو

शायर: Tabish Raihan9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम न कहेंगे ख़ुद ही बताओ क्या ये अच्छा करते हो
फूल से नाज़ुक जिस्म के अंदर पत्थर सा दिल रखते हो

तुम से बिछड़ कर मर जाऊँगा या पागल हो जाऊँगा
मुझ से जुदा हो कर तुम भी आराम से कब रह सकते हो

एक से बढ़ कर एक हसीं हैं चेहरे और भी दुनिया में
आख़िर मुझ को इक तुम ही क्यों सब से अच्छे लगते हो

चलते हो तो बाद-ए-सबा भी साथ तुम्हारे चलती है
फूल बरसते हैं होंटों से जब तुम बातें करते हो

इक मैं हूँ जो ग़म में तुम्हारे ख़ून के आँसू रोता हूँ
इक तुम हो जो मुझ को पागल जान के मुझ पर हँसते हो

आप ही आप खिंचा जाता है दिल कम्बख़्त तुम्हारी ओर
आख़िर मुझ पर ओ जादूगर क्या जादू कर बैठे हो

मैं हूँ इक बदनाम-ए-ज़माना देखो मेरे साथ न आओ
हो जाओगे मुफ़्त में रुस्वा क्यों नादानी करते हो

लगता है तुम ने भी कहीं पर ज़ख़्म-ए-मोहब्बत खाया है
तब ही तो इतने गुम-सुम और खोए खोए रहते हो

'ताबिश' ये क्या पागल-पन है याद में इक हरजाई के
सारी दुनिया सोई है तुम बैठे तारे गिनते हो