उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dushman mere pichhe hai to dariya mere aage

दुश्मन मिरे पीछे है तो दरिया मिरे आगे

دشمن مرے پیچھے ہے تو دریا مرے آگے

शायर: Tabish Raihan8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुश्मन मिरे पीछे है तो दरिया मिरे आगे
अब कोई बचा ही नहीं रस्ता मिरे आगे

तौहीन न कर तू मिरी ग़ुर्बत की सर-ए-आम
मत फेंक हिक़ारत से ये सिक्का मिरे आगे

मैं सच का तरफ़-दार था वो झूट का हामी
ता-देर भला कैसे ठहरता मिरे आगे

घेरे हैं अभी मुझ को ज़माने के मसाइल
मत छेड़ अभी इश्क़ का क़िस्सा मिरे आगे

एहसान किया जिस पे उसी ने मुझे लूटा
लो आ गया नेकी का नतीजा मिरे आगे

ऐ वक़्त के मुंसिफ़ ये तुझे ज़ेब नहीं है
मत पढ़ किसी ज़ालिम का क़सीदा मिरे आगे

दुनिया-ए-मोहब्बत का मैं दरवेश हूँ यारो
इक रोज़ झुकेगा ये ज़माना मिरे आगे

तस्लीम करूँ कैसे भला उस की बड़ाई
'ताबिश' तो हुआ है अभी पैदा मिरे आगे