उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaj ka jo kaam tha kal par uTha kar rakh diya

आज का जो काम था कल पर उठा कर रख दिया

آج کا جو کام تھا کل پر اٹھا کر رکھ دیا

शायर: Tabish Raihan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज का जो काम था कल पर उठा कर रख दिया
मैं ने यूँ हर क़ीमती मौक़ा' गँवा कर रख दिया

जिस तरफ़ भी देखिए बस जोकरों की भीड़ है
आप ने तो मुल्क को सर्कस बना कर रख दिया

लड़ रहा था ज़ुल्मत-ए-शब से अकेला इक चराग़
सर-फिरी आँधी ने उस को भी बुझा कर रख दिया

कैसे होगी सुर्ख़-रू दुनिया में आख़िर ऐसी क़ौम
जिस ने अहकाम-ए-इलाही को भुला कर रख दिया

क्यों मैं तेरे 'इश्क़ का हर सू ढिंढोरा पीटता
क़ीमती सामान था दिल में छुपा कर रख दिया

आ रहे हैं अब वो इक़रार-ए-मोहब्बत के लिए
दोस्तों ने जब मुझे नहला धुला कर रख दिया

पेट की ख़ातिर किसी ने बेच डाली आबरू
आज इस मंज़र ने 'ताबिश' को हिला कर रख दिया