उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pyar anqa hai miyan shahr-e-mohabbat mein bhi

प्यार 'अन्क़ा है मियाँ शहर-ए-मोहब्बत में भी

پیار عنقا ہے میاں شہر محبت میں بھی

शायर: Faheem Zia5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

प्यार 'अन्क़ा है मियाँ शहर-ए-मोहब्बत में भी
इक रुकावट है यहाँ कार-ए-सुहूलत में भी

एक नाकाम मोहब्बत की बदौलत हम-दम
दिल गिरफ़्ता है मिरा 'अह्द-ए-मसर्रत में भी

छोड़ कर कार-ए-जहाँ याद तुझे करते थे
अब हमें याद नहीं आता तू फ़ुर्सत में भी

ख़ुद को बर्बाद मोहब्बत में मुकम्मल न किया
काम आना था मुझे अगली मोहब्बत में भी

इतना बे-ज़ार हुआ हूँ मैं तिरी फ़ुर्क़त में
इक अज़िय्यत है मुझे लफ़्ज़-ए-मसर्रत में भी