उर्दू शायरी · ग़ज़ल

purab des ki yaaden laya phir mausam ka tikha-pan

पूरब देस की यादें लाया फिर मौसम का तीखा-पन

پورب دیس کی یادیں لایا پھر موسم کا تیکھا پن

शायर: Kailash Mahir5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पूरब देस की यादें लाया फिर मौसम का तीखा-पन
मुझ से पहरों उन्स करे है तन्हाई का सूना-पन

दिल के रंग-महल में जैसे बरसों कोई न झाँका हो
तस्वीरों की बे-नूर आँखें शीशा शीशा धुँदला-पन

कितनी बार लहू रोया है कितनी बार जले हैं चराग़
कितने ग़मों की आँच में निखरा दर्द का मीठा मीठा-पन

हम ठहरे दरवेश जनम से प्यार किया तो आ बैठे
हम से क्या ये तीखी नज़रें हम से क्या बेगाना-पन

अनजाने लोगों तक पहुँचा ज़िक्र तुम्हारी चाहत का
गली गली मशहूर हुआ है 'माहिर' का दीवाना-पन