उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pur-KHulus jazbon ka dan to nahin lete

पुर-ख़ुलूस जज़्बों का दान तो नहीं लेते

پرخلوص جذبوں کا دان تو نہیں لیتے

शायर: Aarif Nazeer5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पुर-ख़ुलूस जज़्बों का दान तो नहीं लेते
जान कहने वालों की जान तो नहीं लेते

इक ज़रा सा ये सुन कर तुम से प्यार है हम को
यूँ कमान-ए-अबरू को तान तो नहीं लेते

मैं जो कहना चाहूँ तुम ख़ुद ही बोल देते हो
राज़-ए-दिल हक़ीक़त में जान तो नहीं लेते

गो गुज़िश्ता 'आशिक़ है कुछ भरम तो बनता है
जान ले चुके थे ना मान तो नहीं लेते

ये तो आप हैं 'आरिफ़' इतने सर-चढ़े हैं जो
वर्ना हर किसी की हम मान तो नहीं लेते