उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pohncha isi bahane mera fan kamal ko

पहुँचा इसी बहाने मिरा फ़न कमाल को

پہنچا اسی بہانے مرا فن کمال کو

शायर: Qamar Malal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पहुँचा इसी बहाने मिरा फ़न कमाल को
उर्दू सिखा रहा था मैं इक ख़ुश-जमाल को

उस का सुराग़ मिल नहीं पाया कि बारहा
देखा तलाश कर के दिल-ए-यर्ग़माल को

खुर्चूँगा अपने दिल से तिरा एक एक नक़्श
झटकूँगा ज़ेहन से मैं तिरे हर ख़याल को

हम को अमर रखेगी हमारी सुख़नवरी
तरसेगा ये ज़माना हमारे ज़वाल को

दफ़्तर हो क़ुर्ब-ए-दोस्त हो या महफ़िल-ए-सुख़न
तन्हा हर एक बज़्म में पाया 'मलाल' को