उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pichhe pichhe aata hun

पीछे पीछे आता हूँ

پیچھے پیچھے آتا ہوں

शायर: Zafar Iqbal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पीछे पीछे आता हूँ
आँखें मीचे आता हूँ

ऊपर आ नहीं सकते आप
मैं ही नीचे आता हूँ

चल नहीं सकता अपने आप
ख़ुद को खींचे आता हूँ

कहीं गए होते हैं फूल
जिस बाग़ीचे आता हूँ

डरता हूँ बे-शर'ई से
बिन पाएँचे आता हूँ

नाक अपनी ही तोडूँगा
मुट्ठी भींचे आता हूँ

जाऊँगा आछे भी 'ज़फ़र'
अभी तो ईछे आता हूँ