उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pi bhi ai maya-e-shabab sharab

पी भी ऐ माया-ए-शबाब शराब

پی بھی اے مایۂ شباب شراب

शायर: Qalaq Merathi13 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पी भी ऐ माया-ए-शबाब शराब
गर्म-जोशी से है कबाब शराब

मरयमी उड़ गई मसीहा की
लब-ए-नाज़ुक पे है शराब शराब

उस से हम जा भिड़े 'अदू के घर
है पड़ी ख़ानुमाँ-ख़राब शराब

क्यूँ कि मुतलक़ हराम ही कहिए
पीजिएगा मिला के आब शराब

बहर-ए-हर-ज़र्फ़-ए-इम्तिहाँ साग़र
हर तमन्ना का इंतिख़ाब शराब

बा'द-अज़ीं मोहतसिब क़सम ले ले
तौबा करता हूँ ला शिताब शराब

ज़ाए' औक़ात को नहीं करते
पीते हैं वक़्त-ए-माहताब शराब

सख़्त मातम है ऐ शबाब तिरा
कि रुलाती है ख़ून-ए-नाब शराब

मोहतसिब उस का ख़ून है किस पर
जो है पीता बजाए आब शराब

मुसहफ़-ओ-ख़िर्क़ा बेचते हैं हम
हो गई जान को 'अज़ाब शराब

उस की बख़्शिश है बे-हिसाब अगर
हम भी पीते हैं बे-हिसाब शराब

हर घड़ी ज़िक्र-ए-मय है ऐ वा'इज़
हो गई तेरी तो किताब शराब

ऐ 'क़लक़' मय-कदे में सज्दे क्यूँ
कौन देगा पए-सवाब शराब