उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phuTa udas jism se mausam bahaar ka

फूटा उदास जिस्म से मौसम बहार का

پھوٹا اداس جسم سے موسم بہار کا

शायर: Zafar Iqbal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फूटा उदास जिस्म से मौसम बहार का
मौज-ए-हवा पे फूल खिला इंतिज़ार का

ऐसे है जैसे आँख की पुतली के वस्त में
नक़्शा बना हुआ हो किसी ख़्वाब-ज़ार का

अब्र-ए-ख़िज़ाँ है छाँव छतर मेरे आर-पार
नश्शा मिरे वुजूद में है नोक-ए-ख़ार का

आँखें अटी हुई किसी साहिल की रेत से
मंज़र खुला हुआ किसी दरिया के पार का

'आदिल' को भी बुलाएँ मरम्मत के वास्ते
पत्थर उखड़ गया है ग़ज़ल के मज़ार का