उर्दू शायरी · ग़ज़ल

parde mein har aawaz ke shamil to wahi hai

पर्दे में हर आवाज़ के शामिल तो वही है

پردے میں ہر آواز کے شامل تو وہی ہے

शायर: Jagdeesh Jain7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पर्दे में हर आवाज़ के शामिल तो वही है
मैं लाख बदल जाऊँ मगर दिल तो वही है

कुछ फ़र्क़ नहीं दैर-ओ-हरम में दिल-ए-नादाँ
महफ़िल हो कोई रौनक़-ए-महफ़िल तो वही है

हर रंग हर आवाज़ हर इक शक्ल-ए-हसीं में
है कोई अगर प्यार के क़ाबिल तो वही है

महसूस जो होता है दिखाई नहीं देता
दिल और नज़र में हद-ए-फ़ासिल तो वही है

ज़र्रों में धड़कते हुए दिल देखे हैं जिस ने
इंसान की तौक़ीर के क़ाबिल तो वही है

सद-शुक्र कि हर हाल में जीते हैं यहाँ लोग
हासिल न सही काविश-ए-हासिल तो वही है

'जगदीश' तिरे लुत्फ़ से महरूम नहीं है
लेकिन दिल-ए-बेताब की मुश्किल तो वही है