उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aashna jab apni hasti se bashar ho jaega

आश्ना जब अपनी हस्ती से बशर हो जाएगा

آشنا جب اپنی ہستی سے بشر ہو جائے گا

शायर: Jagdeesh Jain7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आश्ना जब अपनी हस्ती से बशर हो जाएगा
राज़-ए-हक़ से भी यक़ीनन बा-ख़बर हो जाएगा

दहर में हस्सास-फ़ितरत जब बशर हो जाएगा
पत्थरों का शहर शीशे का नगर हो जाएगा

डूबते सूरज पे आख़िर तब्सिरा मैं क्यों करूँ
हर चराग़-ए-शाम तनवीर-ए-सहर हो जाएगा

जब सितारा झिलमिलाएगा सहर की गोद में
ख़ुद नई हस्ती का सूरज जल्वा-गर हो जाएगा

आगही ने तोड़ दी माज़ी की दीवारें ख़मोश
अब जो लम्हा आएगा वो मो'तबर हो जाएगा

था ब-क़ौल-ए-'मीर' दिल्ली एक शहर-ए-इंतिख़ाब
क्या ख़बर थी वो भी ख़्वाबों का नगर हो जाएगा

जैसे गुज़रे शहर से दीवाना कोई बे-ख़बर
ज़ीस्त से 'जगदीश' अपना यूँ गुज़र हो जाएगा