उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jahan mein DhunD rahe ho masarraten kaisi

जहाँ में ढूँड रहे हो मसर्रतें कैसी

جہاں میں ڈھونڈ رہے ہو مسرتیں کیسی

शायर: Jagdeesh Jain6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जहाँ में ढूँड रहे हो मसर्रतें कैसी
ये ग़म-कदा है मियाँ इस में राहतें कैसी

मिरे गुनाहों पे छाई हैं रहमतें कैसी
'अता हुई हैं मुक़द्दर को रिफ़'अतें कैसी

जहाँ में तुझ को है शिकवा 'अबस अँधेरों का
अगर हो दिल में उजाला तो ज़ुल्मतें कैसी

थे और लोग भी महफ़िल में महव-ए-नज़्ज़ारा
फ़क़त हमीं पे हैं 'आएद ये तोहमतें कैसी

ये किस ने आइना दिखला दिया है माज़ी को
रुकी हैं एक ही मरकज़ पे सा'अतें कैसी

है सहमी सहमी गुलों की शगुफ़्तगी 'जगदीश'
रुकी रुकी हैं तबस्सुम की हसरतें कैसी