उर्दू शायरी · ग़ज़ल

parda aankhon se haTane mein bahut der lagi

पर्दा आँखों से हटाने में बहुत देर लगी

پردہ آنکھوں سے ہٹانے میں بہت دیر لگی

शायर: Yasmeen Hameed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पर्दा आँखों से हटाने में बहुत देर लगी
हमें दुनिया नज़र आने में बहुत देर लगी

नज़र आता है जो वैसा नहीं होता कोई शख़्स
ख़ुद को ये बात बताने में बहुत देर लगी

एक दीवार उठाई थी बड़ी उजलत में
वही दीवार गिराने में बहुत देर लगी

आग ही आग थी और लोग बहुत चारों तरफ़
अपना तो ध्यान ही आने में बहुत देर लगी

जिस तरह हम कभी होना ही नहीं चाहते थे
ख़ुद को फिर वैसा बनाने में बहुत देर लगी

ये हुआ तू कि हर इक शय की कशिश माँद पड़ी
मगर इस मोड़ पे आने में बहुत देर लगी