उर्दू शायरी · ग़ज़ल

palak se ek ishaara bas kiye jate to ruk jate

पलक से इक इशारा बस किए जाते तो रुक जाते

پلک سے اک اشارہ بس کئے جاتے تو رک جاتے

शायर: Om Bhutkar Maghloob5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पलक से इक इशारा बस किए जाते तो रुक जाते
निकलते दम ख़फ़ा हो कर नहीं आते तो रुक जाते

सताया ही नहीं तुम ने ज़रा सा भी कभी हम को
मेहरबाँ तुम कभी हम पर सितम ढाते तो रुक जाते

सुना हम ने तुम्हें अक्सर अजब से गीत गाते बस
किसी दिन के किनारे इक ग़ज़ल गाते तो रुक जाते

हमें महफ़िल में रुकने का तो था बस एक ही रस्ता
वहाँ महफ़िल में जाते और ज़हर खाते तो रुक जाते

ये गुल-दस्ते के बदले में जहाँ मिलते थे हम अक्सर
वहाँ के पेड़ की पत्ती उठा लाते तो रुक जाते