उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pakDa gaya main zauq-e-tamasha ke zor mein

पकड़ा गया मैं ज़ौक़-ए-तमाशा के ज़ोर में

پکڑا گیا میں ذوق تماشا کے زور میں

शायर: Zafar Iqbal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पकड़ा गया मैं ज़ौक़-ए-तमाशा के ज़ोर में
होता है यूँ भी फ़र्क़ 'ज़फ़र' चोर चोर में

आया था घर से एक झलक देखने तिरी
मैं खो के रह गया तिरे बच्चों के शोर में

ज़ंजीर सी बनी हुई बालों के उस तरफ़
तस्वीर सी तनी हुई आँखों की ओर में

इक राज़ था चमकते हुए सुर्ख़ रंग का
संगीन कारनिस पे धरे सब्ज़ मोर में

गुज़रूँगा उस के जिस्म के जंगल से किस तरह
आतिश भरी हुई है मिरी पोर पोर में

बिखरे हुओं को मोतियों की तरह ऐ 'ज़फ़र'
किस ने पिरो दिया है किसी डर की डोर में