उर्दू शायरी · ग़ज़ल

paida ye ghubar kyun hua hai

पैदा ये ग़ुबार क्यूँ हुआ है

پیدا یہ غبار کیوں ہوا ہے

शायर: Zafar Iqbal9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पैदा ये ग़ुबार क्यूँ हुआ है
और आख़िरी बार क्यूँ हुआ है

मैं कब से खड़ा हूँ इस किनारे
दरिया मिरे पार क्यूँ हुआ है

सब कुछ तब्दील होते होते
शबनम से शरार क्यूँ हुआ है

देखा हुआ रास्ता ये मेरा
दुश्वार-गुज़ार क्यूँ हुआ है

घेरे में लिए हुए हूँ ख़ुद को
हर-सू ये हिसार क्यूँ हुआ है

जो पाँव पकड़ रहा था पहले
अब सर पे सवार क्यूँ हुआ है

छोड़ा था जो काम दिल ने उस पर
फिर से तय्यार क्यूँ हुआ है

पहले तो नहीं था ये तरीक़ा
मजमा ये क़तार क्यूँ हुआ है

आबा तो 'ज़फ़र' नहीं थे ऐसे
फिर शेर शिआर क्यूँ हुआ है