उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pahunch nahin to mohabbat ka hausla kya hai

पहुँच नहीं तो मोहब्बत का हौसला क्या है

پہنچ نہیں تو محبت کا حوصلہ کیا ہے

शायर: Ijtiba Rizvi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पहुँच नहीं तो मोहब्बत का हौसला क्या है
ख़ुदा के पूजने वाले बता ख़ुदा क्या है

तलब की ज़िल्लत-ओ-बेचारगी मआ'ज़-अल्लाह
मिरी ख़ुदी का तशन्नुज है ये दुआ क्या है

हम उठ खड़े हुए दुनिया से झाड़ कर दामन
कि इन बुझे हुए ज़र्रात में धरा क्या है

रवा है क्या तिरी दुनिया में नारवा क्या है
मुझे बता कि ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है

ये इत्तिहाद-ए-तबीअ'त ये इख़्तिलाफ़-ए-मिज़ाज
ये तुर्फ़ा-कारी-ए-रफ़्तार-ए-इर्तिक़ा क्या है

ख़ुदा-फ़रोशी-ए-ज़ुहहाद-ए-सज्दा-कोश है क्या
ख़ुदा-फ़रामुशी-ए-रिंद-ए-कज-अदा क्या है

ख़राश-ए-आरज़ू-ए-क़ल्ब-ए-बादशह है क्या
सुकून-ए-ख़ातिर-ए-आसूदा-ए-गदा क्या है

हयात जिस को कहें इक जुनून-ए-गर्म-रवी
ये क्यों है इस की ग़रज़ इस का मुद्दआ' क्या है

कहाँ है अव्वल-ए-अव्वल कहाँ अख़ीर-ए-अख़ीर
नुमूद-ए-बे-सर-ओ-पा का ये सिलसिला क्या है

दिमाग़ में ये तजस्सुस कहाँ से आया है
ये क्यों है क्यों कोई बतलाए और ये क्या क्या है