उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pahle to uski zat ghazal mein sameT lun

पहले तो उस की ज़ात ग़ज़ल में समेट लूँ

پہلے تو اس کی ذات غزل میں سمیٹ لوں

शायर: Chandra Parkash Jauhar Bijnauri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पहले तो उस की ज़ात ग़ज़ल में समेट लूँ
फिर सारी काएनात ग़ज़ल में समेट लूँ

होते हैं रूनुमा जो ज़माने में रोज़-ओ-शब
वो सारे हादसात ग़ज़ल में समेट लूँ

पहले तो मैं ग़ज़ल में कहूँ अपने दिल की बात
फिर सब के दिल की बात ग़ज़ल में समेट लूँ

कोई ख़याल ज़ेहन से बच कर न जा सके
सारे तसव्वुरात ग़ज़ल में समेट लूँ

मक़्बूल-ए-बारगाह-ए-रिसालत हों मेरे शे'र
सरमाया-ए-नजात ग़ज़ल में समेट लूँ

'जौहर' वो बात जिस का तअ'ल्लुक़ हो ज़ीस्त से
ऐसी हर एक बात ग़ज़ल में समेट लूँ