उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chehre se numayan hai ek ek ada gham ki

चेहरे से नुमायाँ है एक एक अदा ग़म की

چہرے سے نمایاں ہے ایک ایک ادا غم کی

शायर: Chandra Parkash Jauhar Bijnauri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चेहरे से नुमायाँ है एक एक अदा ग़म की
इंसाँ जिसे कहते हैं तस्वीर है मातम की

क्यों हम को डराते हो आशोब-ए-जहन्नुम से
दुनिया भी तो आख़िर है इक शक्ल जहन्नुम की

मजबूरी-ओ-माज़ूरी महरूमी-ओ-नाकामी
आख़िर कोई हद भी है इस सिलसिला-ए-ग़म की

हर आन मुक़ाबिल है ये महर-ए-दरख़्शाँ के
जुरअत तो कोई देखे इक क़तरा-ए-शबनम की

जन्नत से निकल कर फिर जन्नत न मिली उस को
क्या क्या अभी लिक्खा है तक़दीर में आदम की

दरकार है गेती को फिर ताज़ा लहू शायद
सुर्ख़ी यही कहती है अफ़साना-ए-आलम की

गिर्दाब में ऐ 'जौहर' ये किस का सफ़ीना है
मौजों के तलातुम में आवाज़ है मातम की