उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aisa nahin ki ek mera ghar udas hai

ऐसा नहीं कि एक मिरा घर उदास है

ایسا نہیں کہ ایک مرا گھر اداس ہے

शायर: Chandra Parkash Jauhar Bijnauri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐसा नहीं कि एक मिरा घर उदास है
तेरे बग़ैर जो भी है मंज़र उदास है

कोई असर दिखा न सका फ़न का मो'जिज़ा
अपने बुतों को देख के आज़र उदास है

पहलू-ए-संग में भी है इक दर्द-मंद दिल
वहशी के सर को फोड़ के पत्थर उदास है

जिस ने किया था क़त्ल किसी बे-गुनाह का
अपने किए पे अब वही ख़ंजर उदास है

ख़ामोश सत्ह-ए-आब है मग़्मूम है फ़ज़ा
कश्ती को ग़र्क़ कर के समुंदर उदास है

जिस दिल के आइने में नहीं अक्स-ए-रू-ए-दोस्त
उस दिल के आइने का मुक़द्दर उदास है

साक़ी की बे-नियाज़ी-ए-पैहम को देख कर
'जौहर' हयात-ए-इश्क़ का साग़र उदास है