उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gul-o-saman nahin gulchin to Khaar rahne de

गुल-ओ-समन नहीं गुलचीं तो ख़ार रहने दे

گل و سمن نہیں گلچیں تو خار رہنے دے

शायर: Chandra Parkash Jauhar Bijnauri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुल-ओ-समन नहीं गुलचीं तो ख़ार रहने दे
चमन में कुछ तो निशान-ए-बहार रहने दे

तुझे जुनूँ की क़सम ऐ दिल-ए-सुकूँ-दुश्मन
तमाम उम्र मुझे बे-क़रार रहने दे

कहीं न हसरत-ए-ख़्वाबीदा फिर से जाग उठे
नवाज़िश-ए-निगह-ए-फ़ित्ना-कार रहने दे

फ़रेब-ए-वा'दा-ए-फ़र्दा बहुत ग़नीमत है
मिज़ाज-ए-दोस्त अगर उस्तुवार रहने दे

ये हादसात-ए-मोहब्बत हैं आज भी दिलकश
अगर सुकूँ से ग़म-ए-रोज़गार रहने दे

नफ़स नफ़स है मोहब्बत में दाइमी 'जौहर'
मगर जो ज़िंदगी-ए-मुस्तआ'र रहने दे