उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pahle taron ka ehtimam kare

पहले तारों का एहतिमाम करे

پہلے تاروں کا اہتمام کرے

शायर: Aadarsh Dubey6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पहले तारों का एहतिमाम करे
बा'द में दोपहर को शाम करे

ख़्वाब आँखों से बहने वाला है
कोई बिस्तर का इंतिज़ाम करे

आशिक़ी दश्त तक नहीं महदूद
क़ैस से कहिए अपना काम करे

प्यास ही खींच लाती है वर्ना
कौन दरिया का एहतिराम करे

जिस को लम्हों में देखनी हो सदी
आ के पहले मुझे सलाम करे

उस को भी तो कहाँ मिली दुनिया
जिस ने दुनिया के ताम-झाम करे