उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pahle pahle bulaya gaya Dakiya

पहले पहले बुलाया गया डाकिया

پہلے پہلے بلایا گیا ڈاکیہ

शायर: Ikram Arfi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पहले पहले बुलाया गया डाकिया
फिर कई बार आया गया डाकिया

कच्चे रस्तों से निकला तो ख़त गिर पड़े
एक पत्थर से टकरा गया डाकिया

लोग दीवार-ओ-दर से लिपटने लगे
एक दिन गाँव में आ गया डाकिया

कच्चे घर की पहुँच से बहुत दूर था
बाद-ओ-बाराँ से घबरा गया डाकिया

दिल पे दस्तक सुनाई न दी फिर कभी
आँख से दूर होता गया डाकिया

हाथ मलती रही ख़्वाहिश-ए-ख़्वांदगी
जो बताया वो लिखता गया डाकिया

आख़िरी ख़त लिए आख़िरी मोड़ पर
आख़िरी बार देखा गया डाकिया