उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pas rah kar bhi bahut dur hain hum bhi tum bhi

पास रह कर भी बहुत दूर हैं हम भी तुम भी

پاس رہ کر بھی بہت دور ہیں ہم بھی تم بھی

शायर: Zafar Mahmood zafar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पास रह कर भी बहुत दूर हैं हम भी तुम भी
किस क़दर बे-बस-ओ-मजबूर हैं हम भी तुम भी

आज भी अंधी सुरंगों में बसर करते हैं
और उजालों से बहुत दूर हैं हम भी तुम भी

कौन क़ातिल है यहाँ सब को ख़बर है लेकिन
गूँगे बहरे बड़े मजबूर हैं हम भी तुम भी

झुक के मिलना हमें इज़्ज़त में कमी लगती है
कितने कम-ज़र्फ़ हैं मग़रूर हैं हम भी तुम भी

साँस भी उस की है ये जिस्म उसी का ताबे'
ऐ 'ज़फ़र' लाग़र-ओ-मा'ज़ूर हैं हम भी तुम भी