उर्दू शायरी · ग़ज़ल

panw patton pe dhire se dharta hua

पाँव पत्तों पे धीरे से धरता हुआ

پاؤں پتوں پہ دھیرے سے دھرتا ہوا

शायर: Aadil Raza Mansoori5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पाँव पत्तों पे धीरे से धरता हुआ
वो गुज़र जाएगा यूँ ही डरता हुआ

बोझ सूरज का सर पर उठाने को है
एक साया नदी में उतरता हुआ

शाम साहिल पे गुम-सुम सी बैठी हुई
और दरिया में सोना बिखरता हुआ

तेरे आने की उस को ख़बर किस ने दी
एक आशुफ़्ता-सर है सँवरता हुआ

देखता रह गया अपनी परछाइयाँ
वक़्त गुज़रा है कितना ठहरता हुआ