उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pani se dur rah ke bhi tairak ho gae

पानी से दूर रह के भी तैराक हो गए

پانی سے دور رہ کے بھی تیراک ہو گئے

शायर: Chandrabhan Khayal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पानी से दूर रह के भी तैराक हो गए
अब सादा-लौह लोग भी चालाक हो गए

मानिंद-ए-बर्क़ या कि था वो सूरत-ए-शरर
ऐसे नज़र उठाई कि हम ख़ाक हो गए

मुश्किल न थी तो डरते नहीं थे किसी से हम
मुश्किल में आ के और भी बेबाक हो गए

तन्हा रहे तो ख़ुद का पता था न ग़ैब का
उन से मिले तो साहिब-ए-इदराक हो गए

हम को अछूत जान के देखो न दूर से
छू कर हमें भी लोग कई पाक हो गए

की बंदगी रसूल-ए-ख़ूदा की तो देखिए
हम भी 'ख़याल' शा'इर-ए-लौलाक हो गए