उर्दू शायरी · ग़ज़ल

oDh kar hadson ne taj mera

ओढ़ कर हादसों ने ताज मिरा

اوڑھ کر حادثوں نے تاج مرا

शायर: P P Srivastava Rind7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ओढ़ कर हादसों ने ताज मिरा
ज़िंदगी से लिया ख़िराज मिरा

ये रुतें क्यों बदलती रहती हैं
सिर्फ़ इतना ही एहतिजाज मिरा

मैं तो तन्हाइयों की महफ़िल हूँ
मुझ में पलता है इक समाज मिरा

कर्ब की इक लपट भी मेरा वुजूद
और सुकूँ-लम्स भी मिज़ाज मिरा

दुखते लम्हों पे पट्टियाँ रख कर
मौसमों ने किया 'इलाज मिरा

दूधिया सुब्ह का हसीं सूरज
रास्ता देखता है आज मिरा

हाल का क्या है हाल तो ऐ 'रिंद'
कल नहीं होगा जो है आज मिरा