उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ochhi thi nazar hi jab to bhala arman-e-tamasha kya karte

ओछी थी नज़र ही जब तो भला अरमान-ए-तमाशा क्या करते

اوچھی تھی نظر ہی جب تو بھلا ارمان تماشا کیا کرتے

शायर: Ijtiba Rizvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ओछी थी नज़र ही जब तो भला अरमान-ए-तमाशा क्या करते
ज़र्रे के जिगर तक जा न सके हम हिम्मत-ए-सहरा क्या करते

रात उस ने नक़ाब उल्टी जो ज़रा सब बंद तअ'य्युन टूट गए
वो वो न रहा हम हम न रहे ऐ शौक़-ए-तमाशा क्या करते

बे-कैफ़ हमारा जीना था बे-मय का साग़र पीना था
उस दिल में तमन्ना ही न उगी हम तर्क-ए-तमन्ना क्या करते

तुम ने ही चमन को लूट लिया तुम ने ही नशेमन फूँक दिया
हम शुक्र की हिम्मत कर न सके शर्मा गए शिकवा किया करते