उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nikle hain diwar se chehre

निकले हैं दीवार से चेहरे

نکلے ہیں دیوار سے چہرے

शायर: Om Prabhakar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

निकले हैं दीवार से चेहरे
बुझे-बुझे बीमार से चेहरे

अपने मिलने वालों के हैं
क्यों इतने लाचार से चेहरे

मेरे घर के हर कोने में
आ बैठे बाज़ार से चेहरे

अर्सा हुआ है नहीं देखे हैं
हम ने सुर्ख़ अनार से चेहरे

वादी के संदूक़ से निकले
चमकीले दीनार से चेहरे