उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nind ko nind aae jati hai

नींद को नींद आए जाती है

نیند کو نیند آئے جاتی ہے

शायर: Om Bhutkar Maghloob8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नींद को नींद आए जाती है
रात मुझ को जगाए जाती है

एक लड़की जो मर गई कब की
वो अभी तक बुलाए जाती है

हर तरह रेत है जो सहरा की
नाम बारिश बताए जाती है

आई तो थी वो गुल खिलाने को
और क्या गुल खिलाए जाती है

कमरा अंदर से बंद कर के वो
क़ैद जग को कराए जाती है

दिन उमीदों को छीन लेता है
रात सपने दिखाए जाती है

मैं हक़ीक़त बताए जाता हूँ
वो कहानी सुनाए जाती है

मैं भी अब घर में कम ही जाता हूँ
माँ भी आदत बनाए जाती है